सच्चे गुरसिख की पहचान

click here to read more teachings of Satguru Baba Hardev Singh Ji Maharaj
जो लोग सच्चे ह्रदय से, मन-वचन-कर्म से एक होकर, दातार-प्रभु से प्रीत करते हैं, जिनका उदेश्य यही है की  प्राणी-मात्र से प्रेम करना है,सेवा करनी है और परोपकार करना है; जिनके ह्रदय में 'न को बैरी न ही बेगाना, सगल  संग हमको बनि  आई' पवित्र भावना है, वही सच्चे गुरसिख हुआ करते हैं। उन्हीं की संसार में पूजा हुआ करती है।  भक्त जो भी कर्म करता है, परोपकार की भावना से करता है । वह ह्रदय से इतना उदार होता है की सबके भले की भावना रखता है और वैसा ही शुद्ध आचरण भी करता है। वह इस बात से हरदम डरता है की किसी इंसान का, किसी भी प्राणी का, किसी भी हालत में मन-वचन और कर्म करके उससे बुरा न हो जाए इसलिए वह मन से उपकारी, वचन से मीठा और कर्म से नेक होता है। उसे किसी से न  ईर्ष्या होती है और न  कभी गंदे और भद्दे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करता। 
----युगप्रवर्तक बाबा गुरबचन सिंह जी 
साभार : गुरमत सामरिक, 2010, पेज 76 
Comments: 1
  • #1

    raman kumar carpi, BO. (Sunday, 23 April 2017 05:50)

    very good sant ji ,mujhe bahut ashha laga ,aap jaise santo ki hi jaroorat hai .dataar aapko shakti samratha de,ta ki aap guru ki awaaj ko jan-jan tak pahunchaa saken,or meri tarf se bhi je shubh kamna hai ke dataar aap ko bhakti ka daan de. aap ko namskar dhan nirankar ji.