जीवन में मनमुख कि अवस्था अहंकार में होती है

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जीवन में मनमुख कि अवस्था अहंकार में   होती है और गुरमुख अवस्था दास भावना में होती है. मनमुखता  को जड़ से उखाड़ना है जो कि गिरावट का कारण है. सन्त-महापुरुष सदैव नम्रता को, दास भावना को अपनाते हैं. वे जहाँ भी रहते हैं, प्यार ही बांटते हैं, अपनी महक ही बांटते हैं. 

सतगुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज, बुक : दर्पण, पेज 75  
Comments: 2
  • #2

    Rajkumar Jadhav (Thursday, 08 June 2017 04:42)

    true

  • #1

    manjusha (Friday, 21 April 2017 03:18)

    ye bat such hai ki manmukh ahankar ka rup hai aur gurumukh apane jivan ko badal deta hai Dhan Nirankar Ji