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परमात्मा एक है, दो-चार नहीं|

  • परमात्मा एक है, दो-चार नहीं| हिन्दुओं का परमात्मा और मुसलमानों का अल्लाह अलग-अलग नहीं|
  • परमात्मा बेअन्त गुणों का स्वामी है, इसलिए परमात्मा के नाम भी (गुणों के कारण) बेअन्त हैं|
  • सूरज-चाँद-सितारे, धरती-जल-अग्नि एंव वायु-जीव आकाश आदि को ईश्वर के तुल्य मानकर, इनका पूजन-अर्चन करना अपनी अज्ञानता का परिचय देना है|
  • परमात्मा किसी गुफा-कन्दरा में या पहाड़ों की चोटियों पर या फिर किसी विशेष धर्म-स्थान पर ही मौजूद नहीं बल्कि हर एक के अंग-संग बसा हुआ है| इसे जंगलों या बियाबानों में ढूढने के लिए जाना व्यर्थ का श्रम है|
  • परमात्मा सबका पिता है| परमात्मा को जानकार ही यह बात समझ में आ सकती है की 'एक पिता एक्स के हम बारक' अथवा 'न को बैरी नाही बेगाना'|

---शहनशाह बाबा अवतार सिंह जी महाराज 

साभार : बुक : शहनशाह, पेज 65-66

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