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uploaded on 23rd January, 2012 time : 10:35 a.m.


मानवता की राह अपनाएँ 

लेखक : श्री समरेश कुमार (जमशेदपुर, झारखण्ड)

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Shri Samresh Kumar Ji
Shri Samresh Kumar Ji

 

मानवता की राह अपनाएँ 

लेखक : श्री समरेश कुमार (जमशेदपुरझारखण्ड)

आज २१वी सदी में मानवता का क्या हाल है? कहा जाता है की पहले की अपेक्षा मनुष्य अधिक सभ्य हुआ है, लेकिन तकनिकी श्रेष्ठता होने और इनोवेटिव माइंडसेट होने के बावजूद मानवता कराह रही है, क्यों ? क्यूँकी आज मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए एक-दुसरे से लड़ रहा है. भावनाओ के लिए अब कोई जगह हीं नहीं बची. आप कष्ट में हैं, तो यह आपकी समस्या है. इससे भला दूसरों को क्या लेना-देना ? भागमभाग की इस दुनिया में हम इतने व्यस्त हो गएँ हैं कि हमारे पास किसी के लिए समय हीं नहीं है. यहाँ यह बात दावे के साथ कही जा सकती है कि मानवता के लुप्त होने के कारण हीं आज भ्रष्टाचार या आतंकवाद जैसी समस्या उभरी है. कुल मिलाकर आदमी मशीन बनने की ओर अग्रसर हुआ है और मशीन से कभी मानवता की उम्मीद नहीं की जा सकती

वैसे इन खबरों से तो हम हर रोज रू--रू होते हीं हैं कि आज यहाँ बम फट गएँ, कल  वहाँ गोली चल गई, सैकड़ों लोगों की जानें चली गई, हजारों घायल हो गएँ या फिर भगदड़ मच गई, ना जाने कितने हताहत हो गयें... वगैरह वगैरह. पर, इन सारी की सारी वारदातों को अंजाम देने वाला भी इंसान हीं होता है, ना कि कोई जानवर!


यहाँ गौरतलब है की मरने वाला व मारने वाला दोनों इंसान हीं होते हैं. बल्कि इंसान तो अब केवल इंसानी ढांचा मात्र बनकर रह गया है, कर्म तो जानवरों से भी गए गुजरे हो गएँ हैं.

"मुख में राम, बगल में छुरी; पल्खत पावत काटत मूड़ी."

 

ईश्वर ने हम इंसानों को सोचने-समझने व बोलकर अपने भावों को प्रकट करने की वो अद्दभूत शक्ति प्रदान की है जो हम इंसानों को अन्य सभी जीवों से पृथक करती है. मगर ये कैसी विडंबना है की आज इंसान, ईश्वर से मिले हुए इस अद्दभूत वरदान का भी दुरूपयोग करता चला जा रहा है. आज तक इंसानी सोच व समझ रुपी शक्ति ने ऐसी किसी भी दवा का अविष्कार नहीं किया होगा जिससे मुर्दों को भी ज़िंदा किया जा सके परन्तु ऐसे-ऐसे बम व मिसाईलों  का निर्माण किया जा चुका है जो की पलक झपकते ही पूरी की पूरी कायनात को मौत के आगोश में सुलाने कि हमाकत रखते हो.


जिस प्रकार चाक़ू तो केवल एक वस्तु  होता है जिसका इस्तेमाल एक डकैत किसी की जान लेने में करता है तो एक डॉक्टर किसी की जान बचाने में, ठीक इसी प्रकार सोच व समझ की शक्ति भी चाक़ू की तरह एक वस्तु ही है, अगर इसे सकारात्मक मार्गदर्शन मिले तो परिणाम भी सकारात्मक मिलेंगे, फिर वो दिन दूर नहीं जब हमें विश्व-बंधुत्व का सपना धरातल पर साकार होता हुआ दिखाई देने लगे.

एक बार की बात है, एक व्यक्ति एक घने जंगल से होकर गुजर रहा था, तभी उसे शेर की दहाड़ सुनाई दी. उसने देखा कि शेर उसी की ओर दौड़ता हुआ चला आ रहा है. व्यक्ति घबराकर भागा और भागकर एक पेड़ पर चढ़ गया परन्तु ऊपर चढ़ते हीं उसके चेहरे का रंग और भी फीका पड़ गया क्यूँकी ऊपर पेड़ की टहनी पर एक भालू पहले से ही विराजमान था. भालू ने देखा की व्यक्ति शेर के डर से घबराया हुआ है, उसने कहा - डरो मत, आराम से बैठो और मुझे तुम अपना मित्र ही समझो.


तभी निचे से शेर ने दहाड़ मारते हुए भालू से कहा - इस व्यक्ति को निचे गिरा दो. भालू ने इनकार में सिर हिलाते हुए कहा - चूँकि अब मैं इसे अपना मित्र बना चुका हूँ इसलिए अब मैं इसे निचे नहीं गिरा सकता. भालू की बात सुनकर शेर निरूत्तर हो गया तथा वहीं पेड़ के निचे बैठकर उस व्यक्ति के निचे उतरने का इंतजार करने लगा. भालू पेड़ की टहनी पर लेट गया व लेटे  लेटे उसकी आँख लग गई.


वहीं, व्यक्ति उसी पेड़ की टहनी पर किनारे बैठकर शेर के चले जाने का इंतज़ार करने लगा. तभी शेर ने धीरे से उस व्यक्ति से कहा कि - अगर तुम इस भालू को निचे गिरा दो तो मैं तुम्हे छोड़ दूंगा.


व्यक्ति ने गहरी निंद्रा में आराम फरमा रहे भालू को धक्का दे दिया. भालू निचे गिरते-गिरते पेड़ कि एक टहनी पकड़ कर लटक गया तथा निचे गिरने से बच गया. अब तो उस व्यक्ति के हक्के-बक्के जाम हो गएँ. उसे लगा कि अब वो गया काम से. तभी भालू व्यक्ति के पास आया और कहा - तुम इंसानों और हम जानवारों में बस यही एक फर्क है. इतना कहकर भालू छलांग लगाकर दुसरे पेड़ पर चला गया.


यहाँ गौरतलब है कि भालू अगर चाहता तो उसे मौत के घात उतार सकता था पर उसने ऐसे नहीं किया, शायद उसके अन्दर मानवता कि भावना विद्वमान थी परन्तु उस व्यक्ति ने अपने मतलब का ईशारा पाते ही उस जीवन रक्षक भालू को भी मौत के हवाले करने में जरा भी संकोच नहीं किया. यहाँ इंसान किसे कहा जाए उस भालू को, जिसने जानवर होते हुए भी अपने स्वभाव के उलट उस व्यक्ति के साथ मानवीय व्यवहार किया या फिर उस व्यक्ति को जिसने अपने जीवन रक्षक भालू को धक्का देकर मौत के हवाले करने जैसा घिनौना अपराध किया?


आज वक़्त ने इंसान को मतलबी बना दिया है, ऐसा लगता है जैसे "मानवता" वक़्त की धुंध में खो सो गई है. अब जरुरत है, धुंध को मिटाने कि व मानवता को अपने ह्रदय के अन्दर पुनर्स्थापित करने की.


ऐसा केवल सदगुरु से ब्रह्मज्ञान रुपी दात प्राप्त करने के उपरांत हीं संभव हैआइये हम ज्ञान प्राप्ति के उपरान्त इस ओर कदम बढ़ाएं.

 

"प्रेम व भक्ति के दो पौधे, हृद्यांगन के मध्य लगायें
घट-घट देखें एक अलख को, अगुण-सगुण के भेद मिटायें
हर मानव है अपना प्यारा, ऐसा दृढ़ विश्वाश जगाएं
निंदा-वैर के काटें बंधन, केवल प्यार के फूल खिलाएं
खुद तो चमके निज कर्मों से, औरो को भी यह समझाएं
धर्म को कायम रखना है तो, मानवता की राह अपनाएँ."  



 

कृपया इस लेख के बारे में अपने विचार सांझा करें.

Comments: 10
  • #10

    PAWAN KUMAR KOHLI (Wednesday, 08 February 2012 02:30)

    dhan nirankar ji,,,, very nice article ji,,, May nirankar bless you always.... sewa, simran aur satsang ka gun-gaan karo,,, maanavta ka uthan karo,,, yeh hai jeevan ka asli maksad,,,

  • #9

    mamta kumari (Tuesday, 07 February 2012 00:56)

    thanks

  • #8

    RAM KUMAR SEWAK (Friday, 27 January 2012 05:46)

    VERY GOOD ARTICLE.MAY GOD NIRANKAR BLESS YOU.D N J

  • #7

    Sunil Singh Bisht (Wednesday, 25 January 2012 06:12)

    DNG DAAS KO BAHUT HI AANAD AAYA ISE PEDKER MERE DATA KIRPA KRNA YEH SABAD BAN KER HI NA REH JAYE HUM ISE APNE JEEVAN MAI BHI APNA PAYE

  • #6

    AJAY KUMAR (Tuesday, 24 January 2012 07:08)

    DNG DAAS KO BAHUT HI AANAD AAYA ISE PEDKER MERE DATA KIRPA KRNA YEH SABAD BAN KER HI NA REH JAYE HUM ISE APNE JEEVAN MAI BHI APNA PAYE

  • #5

    Renuka Nirankari (Tuesday, 24 January 2012 05:06)

    Manavta hai Misson hamara,
    Hum iska Samman kare,
    Vair,Irsha dur hatakar,
    Bus apas mein Pyar kare,
    Renuka Satguru se harpal y Ardas kare,
    kehte hai jise Insan wo Insan pehle hum bane... Dnji..

  • #4

    mahesh kumar, bilaspur chhatisgarh (Tuesday, 24 January 2012 00:43)

    is lekh ke liye bahut bahut dhanyawad. bahut hi prernadayak lekh hai. satguru kripa karen, ham sabhi maanavta ki raah apnayen.

  • #3

    garv arora, faridabad (Monday, 23 January 2012 02:09)

    manurbhav, maanav, maanav ban

  • #2

    yashcsr@gmail.com (Monday, 23 January 2012 01:39)

    very nice............

  • #1

    rajiv sharma (Monday, 23 January 2012 01:20)

    aaj sabhi ko maanav banne ki aavshyakta hai, kewal maanav banne se hi sanvay ka tatha samaj ka kalyan sambhav hai.