uploaded on 12th March, 2012

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क्षमादान एक वरदान

लेखक : पवन कुमार कोहली, तिलक नगर, दिल्ली

Shri Pawan Kumar Kohli, Delhi
Shri Pawan Kumar Kohli, Delhi
इस दुनिया में ऐ दुनिया वालो , बड़ा मुश्किल है इन्साफ करना,
बड़ा आसान है देना सजाएं, बड़ा मुश्किल है माफ़ करना ...
संसार में अनेको प्रकार के  दान होते है  जैसे : धनदान , ज्ञानदान , अंगदान , कन्यादान , प्राणदान , गोदान, वस्त्रदान , अन्नदान  ओर  क्षमा दान आदि, मगर सबसे बड़ा दान क्षमादान होता है , इससे बड़ा कोई ओर दान नही हो सकता क़ि किसी को क्षमा कर दिया जाए . क्षमादान करने वाला देवता के समान होता है .   "क्षमा" कहने में छोटा सा शब्द है लेकिन असल ज़िन्दगी में इसका बहुत ही महत्व है , "क्षमा" शब्द देखने ओर सुनने में बहुत छोटा सा प्रतीत होता है , मगर कहने ओर बोलने में उतना ही कठिन है. " क्षमा  करना ओर क्षमा माँगना दोनों ही जीवन के मार्ग में महत्वपूर्ण है. क्षमा मांगने वाला इंसान अपने मन के अन्दर के अंहकार का विनाश करके दूसरे इंसान से अपनी गलती की क्षमा याचना करता है ,  क्षमा देने वाला  व्यक्ति भी अपने अंहकार से मुक्त होकर क्षमा मांगने  वाले व्यक्ति को माफ़ करता है , इससे दोनों के मन के अन्दर अंहकार का नाश होता है, क्षमा से बहुत हद तक मानव जीवन में अंहकार रुपी  अवगुण को खत्म कर सकते है , मगर आवश्यकता है मन के अन्दर अपनी गलती मानकर दिल से माफ़ी मागना,  क्योंकि कभी भी अंहकारी व्यक्ति क्षमा शब्द से बहुत दूर होता है ,  क्षमा मांगने वाला ओर क्षमा देने वाला दोनों ही बड़े महान माने जाते है , जिसने अपनी गलती मानकर क्षमा वाली  भावना को सीख लिया वह संसार में बहुत ही महान ओर वीर होता है , कहा भी गया है :" क्षमा वीरस्य भूषणम " क्षमा वीरो का आभूषण होता है  The weak can never forgive, Forgiveness is the attribute of the strong,, ( Mahatma Gandhi )
" क्षमा " इंसान का  अनमोल व सर्वौतम  गुण है , क्षमादान व्यक्ति हमेशा संतोषी, वीर,धेर्यशील  , सहनशील तथा विवेकशील होता है . यह व्यक्ति हमेशा शांतिप्रिय तथा मानसिक रूप से संतोषी होता है  वह हमेशा दूसरो का भला करने में विश्वास रखता है .हमेशा प्रभु से सबके भले की कामना  करता है " परम पिता परमात्मा , सब तेरी संतान  , भला करो सबका प्रभु सबका हो कल्याण " ,  क्षमा इंसान को बदले की भावना से  भी ऊपर उठाती है , बदले की भावना होने से इंसान के मन में हमेशा तानव वाला वातावरण रहता है , उसके मन में हमेशा चिंता ओर दूसरों को नीचा दिखाने की भावना जन्म लेती रहती है , इसलिए बदले की भावना को हमेशा अपने जीवन से त्याग करना चाहिए, क्योंकि यह भी भक्ति के आड़े आती है ,There is no revenge  so complete as forgiveness, (Josh billings), क्षमा तो विनय  से प्राप्त होती है, क्षमा इंसानियत की असल पहचान होती है, क्षमा से आपस में प्रेम बढता है, क्षमा दानव इंसान को भी सही इन्सान बना देती है." क्षमा बडन को चाहिए, छोटन को उत्पात" अर्थात ज्ञानीजनो को बड़े लोगो को, छोटे लोगो की  गलती पर उन्हें क्षमा कर देना चाहिए, जो माफ़ करना जानते है वे बड़े होते है, उत्पात छोटेपन की निशानी है.  क्षमा का भाव है मन को साफ़ करना है ,  क्षमा तो प्रेम, करुना, दया, स्नेह ओर प्रीत  जैसे दिव्य गुंणों को दर्शाती है.
 
आज के समय में, हर क्षेत्र में क्षमा शब्द का बोल-बाला है, क्षमा या माफ़ी माँगना  यानि सॉरी कहना आम बात हो गई है , चाहे वह आस-पड़ोस हो, जहा पर लड़ाई - झगडे पर एक-दूसरे  से सॉरी कहना,  रास्ता हो, जहा पर वाहनों का आपस में टकरा जाने पर सॉरी कहना, स्कूल में, शिष्य का घर पर दिए हुए  काम न करने टीचर  को  सॉरी कहना, ऑफिस में टाइम पर ना पहुचने पर अपने बॉस को सॉरी कहना ओर चोर का चोरी करते हुए पकडे जाने पर सॉरी कहना आदि, मगर जहा पर सिर्फ अपने बचाव के लिए सॉरी कहा जाता है, उसका कोई भी मोल नही, क्षमा तो अपनी गलती को दिल से मानकर मांगी जाती है, असल में वही क्षमा होती है, ओर इसके लिए प्रभु के ज्ञान की जरूरत  होती है, जो अपने ज्ञान से सही-गलत बातो को समझाते है.
 
सदगुरु जब अपने गुरु-सिखों को ब्रह्म-ज्ञान देते है तब अपने भक्तो के सभी भूलो , गलतियों ओर बुरे कर्मो को माफ़ कर देते है ओर आगे के जीवन को सेवा , सिमरन ओर सत्संग जैसा सन्मार्ग दिखा के मोक्ष की  ओर अग्रसर होने की प्रेरणा पर हमेशा  जोर  देते  है. सदगुरु अपने विचारो में फरमाते है : No Hate in the world is as powerful as the power of forgiveness, संसार में नफरत से अधिक शक्तिशाली प्रेम ओर क्षमा ही है, क्योंकि नफरत तो  नफरत ही फिलाती   है, नफरत तो उस माचिस के समान है  जिसको थोड़ी से आग दो तो सुलग जाती है, इसलिए हमेशा प्यार को ही बढावा दिया जाता है.  बाबा गुरबचन सिंह महाराज जी ने कहा है कि : - हमें आपस में निभाने के लिए पुरानी बीती हुई बातो को मन से निकालकर शक-संदेह से  ऊपर उठकर परस्पर विश्वास करना होगा, यदि FORGET AND FORGIVE  के सिद्धांत को अपना सके तो निरंकार सच्चा पातशाह सब ठीक करेगा," क्षमा" करना अच्छा है , भूल जाना उससे भी अति-उत्तम " सदगुरु हमेशा ही सबके भले की कामना करते है , क्योंकि उनके दिल में सब के लिए प्रेम होता है, गुरुसिखी में क्षमा का भाव जरुर होना चाहिए, नही तो वह सतगुरु के ज्ञान से वह बहुत दूर है, उसमे गुरुसिखी के मूल गुंणों का अभाव है, सदगुरु क्षमा की वाटिका का गुलजार होता है, निराकार  का साकार रूप सदगुरु , जो हमारे अवगुणों को माफ़ कर देता है :- "गुण अवगुण मेरो कछु ना विचारो बक्श लियो छिन माहि" सदगुरु अपने भक्तो को क्षमा ही नही करता बल्कि मुक्ति वाले मार्ग पर ले जाता है, मगर क्षमा का हकदार सिर्फ वही होगा जो उनके आगे अपने गुनाहों को सच्चे मन से स्वीकार कर ले ओर अपना आपा-अर्पण करके उनसे क्षमा मांगता है , अपने से की गई हुई गलतियों  की क्षमा तब ही मिलगी अगर कोई दूसरों  को भी क्षमा करता होगा. बड़े वो होते है जो क्षमाशील होते है
      " सदगुरु अपने शिष्य  के मन को शीशे जैसा साफ़ करे,, 
        सदगुरु अपने शिष्य  के अवगुण इक क्षण भीतर माफ़ करे"
                                   (सम्पूर्ण अवतार वाणी )
जब ईसा मसीह को काँटों  का ताज पहनाकर सूली पर लटकाया गया तो उन्होंने प्रभु से  प्रार्थना क़ी, कि " हे प्रभु इन्हें क्षमा करना, क्योंकि ये नही जानते है क़ि  यह क्या कर रहे है " बाईबल का फरमान है : " हे प्रभु ! तू हमें माफ़ कर , हमारा क़र्ज़ माफ़ कर ओर हम दूसरों  को भी माफ़ कर सके " आपके मन में किसी के प्रति कोई गलत भावना है तो उसको माफ़  कर दो ताकि प्रभु तुमारे  पाप भी माफ़ कर सके. "जिस व्यक्ति ने महात्मा गाँधी को गोली मारी थी, महात्मा गाँधी ने उसे भी मरने से पूर्व यह कहकर क्षमा कर दिया क़ि वह बेकसूर है, श्री राम जी ने रावण के भाई विभीषण को अपने पास शरण दी, उस समय अगर रावण भी आ जाता तो उसको भी क्षमा कर देते, महाभारत में, कौरव के  अपने  थोड़े  से अपमान और अहंकार के कारण इतनी महाभारत  युद्ध की रचना रची गई, यदि उस समय वे अपनी विशालता,सहनशीलता ओर क्षमादान की प्रवृति को अपनाते तो आज भारत देश की दशा कुछ और ही  होती, भगवान् श्री कृष्ण जी ने शिशुपाल जैसे दुष्ट की सौ  गलतिया  माफ़ कर दी.  सदगुरु बाबा हरदेव सिंह महाराज जी ने बलिदान, शांति कायम रखने के लिए क्षमादान का परिचय दिया. उन्होंने अपने सदगुरु के हत्यारे को  क्षमा  करके संसार में एक अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया.
 
महात्मा बुद्ध के अनुसार - क्षमा भावना हमें कई मुसीबतों से बचाती है . बुराई का बदला बुराई से नही क्षमा करके देने से बुराई का नाश होता है ,  
           
          " बुरिआ नाल सभ  बुरा करेंदे,  माफ़ करन कई स्याने ,
          बुरिआ नाल  फिर  नेकी करना  एह  गुरु नानक  जाणे "
                         
कहते है क़ि बुरे लोगो के साथ बुरा व्यवहार ओर अच्छे लोगो के साथ अच्छा व्यवहार करना, यह तो आम बात है यह कार्य तो कोई भी कर सकता है  एक बुरे इंसान के साथ अच्छा व्यवहार करना , उसके साथ भला करना  ओर फिर उसे माफ़ करना . ये ही संतो-महापुरुषो की  निशानी है ,केवल क्षमा कर देना ही गुरु-सिख की पूर्णता नही है , परन्तु  बुरे का भला करना पूर्णता की निशानी है  गुरसिख कभी भी किसी से भेद -भाव नही करता बल्कि गुरमत के मार्ग पर सहज अवस्था में चलता रहता है. महात्माओं की प्रवृति तो इस प्रकार की होती है - 
एक बार बारिश के मौसम   में कुछ साधू-महात्मा अचानक  कबीर जी के घर आ गए , बारिश के कारण कबीर साहिब जी बाज़ार में कपडा बेचने नही जा सके, ओर घर पर खाना भी काफी नही था , उन्होंने अपनी पत्नी लोई से पूछा , " क्या कोई दुकानदार कुछ  आटा -दाल हमे उधार दे देगा , जिसे हम बाद में कपडा बेचकर चूका देगे " पर एक गरीब जुलाहे को भला कौन उधार देता जिसकी कोई अपनी आय भी नही थी.  लोई कुछ दुकानदार पर सामान लेने  गई पर सभी ने नकद पैसे मांगे. आखिर एक दुकानदार  ने उधार देने के  लिए उसके सामने  एक शर्त रखी , वह एक रात उसके साथ बिताएगी , इस शर्त पर लोई को बहुत बुरा तो लगा , लेकिन वह खामोश रही,,, जितना आटा-दाल  उन्हें चाहिए था, दुकानदार  ने दे दिया,  जल्दी से घर आकर लोई ने खाना बनाया , ओर जो दुकानदार  से बात हुई थी  कबीर साहिब को बता  दी ,,  रात होने पर कबीर साहिब ने लोई से कहा क़ि दुकानदार  का क़र्ज़ चुकाने का समय आ गया है , साथ में यह भी कहा की चिंता मत करना , सब ठीक हो जाएगा,  जब वह तैयार  हो कर जाने लगी, कबीर जी बोले क़ि बारिश हो रही है ओर गली कीचड़ से भरी है , तुम  कम्बल ओढ़ लो , मै तुमे कंधे पर उठाकर ले चलता हू, जब दोनों दुकानदार  के घर पर पहुचे , लोई अन्दर चली गई  ओर कबीर जी दरवाजे के बाहर उसका इंतज़ार करने लगे, लोई को देखकर दुकानदार  बहुत खुश हुआ , पर जब उसने देखा की बारिश के बावजूद  न लोई के कपडे भीगे है ओर ना ही  पाँव , तो उसे बहुत हैरानी  हुई , उसने पूछा " यह क्या बात है क़ि कीचड़ से भरी गली में से तुम आई हो , फिर भी तुमारे  पावो पर कीचड़ का एक दाग भी नही , तब लोई ने जवाब दिया " इसमें हैरानी की कोई बात नही , मेरे पति मुझे कम्बल ओढा कर अपने कंधे पर बिठाकर यहाँ पर लाये है .. यह सुनकर दुकानदार  बहुत दंग रह गया, लोई का निर्मल ओर निष्पाप चेहरा देखकर वह बहुत प्रभावित हुआ ओर अविश्वास से उसे देखता रहा, जब लोई ने कहा की उसके  पति कबीर साहिब  जी वापस ले जाने के लिए बाहर उसका  इंतज़ार कर रहे है तो दुकानदार को  अपनी  नीचता ओर कबीर साहिब जी की महानता को देख-देख कर शर्म से पानी-पानी होने लगा  , उसने लोई ओर कबीर साहिब जी से दोनों घुटने टेक कर क्षमा-याचना  मांगी ,  कबीर साहिब जी  ने उसको  क्षमा कर दिया ओर दुकानदार  , कबीर जी के दिखाए हुए मार्ग पर चल पड़ा जोकि था परमार्थ का मार्ग, ओर समय के साथ उनके प्रेमी भक्तो में गिना जाना लगा. भाव येही है क़ि भटके हुए जीवो को सही रास्ते  पर लाने के लिए संतो के अपने ही तरीके होते है ,पूर्ण संत हर काल में हर किसी की के मन की  मैल  ओर विकारो को प्रभु का ज्ञान करवाकर प्रभु की कृपाद्रष्टि का पार्थ बनाता है ....
 
              " संत ने छोड़े संतई चाहे कोटिक मिले असंत ,
                चन्दन विष व्यामत नही लिपटे रहत भुजंग "
 
सन्त महात्मा तो सही मायनों में क्श्मशीएल होने का प्रमाण देकर हमें क्षमा का मार्ग बता रहे है , हमें उनके आदेशो-उपदेशो पर चलते रहना चाहिए , क्षमा एक सत्संग, सेवा ओर सिमरन का परिणाम है जिस पर चलकर हम  उदारता, प्रभु-भक्ति , परमात्मा की शरण  ,मुक्ति का मार्ग ओर अपने जीवन के कर्मो को सुचारू रूप से कर सकते है ,,,   संत कबीर जी ने कहा है क़ि :-
 
              " जहाँ  ज्ञान वहाँ धर्म है  जहाँ झूठ वहाँ पाप ,
                 जहाँ लोभ वहा काल है, जहाँ  क्षमा वहाँ आप I
 
जहा क्षमा की भावना होती है , मिलवर्तन ओर भाई-चारे की भावना होती है वहाँ प्रभु-परमात्मा -निरंकार खुद विराजमान रहता है
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