सन्त वही है, जिसमें सन्तों के गुण हों.........

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सन्त वही है, जिसमें सन्तों के गुण हों, जिसके पास परमात्मा का ज्ञान हो, सहनशक्ति हो, जिसके दिल में सबके लिए प्यार हो, मानवमात्र के भले की सोचता हो, जिसने अपना जीवन गुरुओं-पैगम्बरों के आदेशों के अनुसार ढाल रखा हो. हमने भी ऐसा ही जीवन जीना है, प्यार और सेवा भाव से सबको नजदीक लाना है. नफरत से तो पहले ही इन्सान अलग-अलग हुए पड़े हैं. अगर और नफरत फैले तो दुनिया का सर्वनाश हो जायेगा. हमने अपने सद्व्यवहार से नफरत को समाप्त करना है, प्यार की दुनिया बसानी है.
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निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज, बुक : दर्पण, पेज 80
Comments: 2
  • #2

    vinay (Wednesday, 01 June 2016 00:39)

    2345

  • #1

    nirmala (Thursday, 19 May 2016 01:17)

    True