सन्त-महापुरुष परोपकारी होते हैं

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सन्त-महापुरुष परोपकारी होते हैं I  सदगुरु की कृपा से उन्हें जो ज्ञान मिला होता है, आनंद मिला होता है, उसे वे अपने तक ही सीमित नहीं रखते, बल्कि गली-गली, मुहल्ले-मुहल्ले में जाकर इसे बांटते हैं I  महापुरषों के दिलों में ऊँच-नीच की कोई भावना नहीं होती I  वे जाति-वर्ण का भेद नहीं मानते I  उनकी नज़र में गरीब-अमीर सभी बराबर होते हैं I  वे सभी से एक जैसा प्यार करते हैं उनका यही ध्यान होता है की ज्ञान से जो सुख उन्हें मिला है, वह औरों को भी मिले, सभी इससे लाभ उठा पाएं I  इसलिए वे हर गली-मुहल्ले में जा-जाकर इसका प्रचार करते हैं I  वे ज्ञान का आनंद अपने तक ही सीमित नहीं रखते I 

सदगुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज, बुक : गुरुदेव हरदेव, भाग -1 
Comments: 1
  • #1

    nirmala (Thursday, 19 May 2016 01:17)

    True