महापुरुष अपने ऊपर सब कुछ सहन करके भी दूसरों को सुख ही देते हैं.

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महापुरुष अपने ऊपर सब कुछ सहन करके भी दूसरों को सुख ही देते हैं. जैसे दास अक्सर बताता है की चन्दन के पेड़ पर भले ही कितने सांप लिपट जाएँ या हम उसे किसी तेज कटार या कुल्हाड़ी से काटें तब भी वह हमेशा महक ही प्रदान करता है. इसी प्रकार गुरमुख का सवभाव ही यह बन जाता है की वह सदैव सबका भला ही मांगता है, भला ही करता है.
सतगुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज, बुक : दर्पण, पेज 69
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