कबीरा सदगुरु क्या करे, जो सिखन में चूक

"ज्ञान का दाता सदगुरु होता है| सदगुरु जीवन जीने की जो जाच सिखाता है, उस पर गुरसिख को चलना होता है| अगर कोई गुरसिख सदगुरु के वचनों का उल्लंघन करके मनमती से काम लेता है तो सेवा, सुमिरन, सत्संग भी उसका पूरा सहारा नहीं बन पाता|" शहनशाह जी ज़रा गंभीर स्वर में फरमाने लगे,"गुरु मर्यादा का पालन किए बिना गुरसिख का लोक खुशियों से नहीं भर सकता| गुरु अगर कहता है की मीठा बोलो, किसी से छल-कपट न करो, किसी का हक न दबाओ, किसी का दिल न दुखाओ, तो जो गुरु के आदेशानुसार ऐसे कर्म करते हैं, उनके जीवन में बहार भी आती है और निखार भी| वे मुक्ति के हकदार भी बने रहते हैं|

 

एक लम्बी सांस भरकर शहनशाह जी ने कहा की| शास्त्री साहिब, कबीरा सदगुरु क्या करे जो सिखन में चूक|

 

---सतगुरु शहनशाह बाबा अवतार सिंह जी महाराज

साभार : बुक शहनशाह, पेज 17-18