जीवन में मनमुख कि अवस्था अहंकार में होती है

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जीवन में मनमुख कि अवस्था अहंकार में   होती है और गुरमुख अवस्था दास भावना में होती है. मनमुखता  को जड़ से उखाड़ना है जो कि गिरावट का कारण है. सन्त-महापुरुष सदैव नम्रता को, दास भावना को अपनाते हैं. वे जहाँ भी रहते हैं, प्यार ही बांटते हैं, अपनी महक ही बांटते हैं. 

सतगुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज, बुक : दर्पण, पेज 75  
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