हम वास्तव में कितने भक्त हैं?

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हम वास्तव में कितने भक्त हैं, उनकी पहचान तो हमारा अर्पण भाव है, हमारी सहनशीलता है. जब हम दूसरे के वचनों को सहन कर लेते हैं, कोई हमें बुरा-भला कहता है तब भी हम उसका भला मांगते हैं तथा माया का कोई भी रूप हमारे सामने हमें डावांडोल करने आ जाता है तो भी हम दुलायमान नहीं होते, इस निरंकार का आसरा नहीं छोड़ते, तब ही वास्तव में हम भक्त हैं, यही हमारी भक्ति की पहचान होती है.
सतगुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज,
बुक : दर्पण, पेज 99
Comments: 1
  • #1

    nirmala (Thursday, 19 May 2016 01:17)

    True