गुरु से प्यार और विशवास कम होता है तो

click here to read more teachings of Satguru Baba Hardev Singh Ji Maharaj
click here to read more teachings of Satguru Baba Hardev Singh Ji Maharaj
सत्संग में हरी यश होता है, ज्ञान चर्चा होती है, महापुरुष अपने जीवन के अनुभव बताते हैं. इनको सुनने से दृढ़ता आती है, निरंकार-सदगुरु पर विशवास पक्का होता है. महात्माओं ने तो यहाँ तक कहा की संगत, गुरु और निरंकार एक ही सत्ता के तीन नाम हैं. इनमें से यदि किसी एक को भी छोड़ दें, तो धीरे-धीरे तीनों ही छूट जाते हैं. जैसे-जैसे कोई सत्संग से परे हटता है, उसका गुरु से प्यार भी कम होता जाता है, गुरु से प्यार और विशवास कम होता है तो निरंकार का ध्यान भी कम होने लगता है. सत्संग को तो परमार्थ में पहली सीड़ी माना गया है. जो महापुरुष नित्यप्रति सत्संग करता है, उसका गुरु से प्यार और निरंकार पर विशवास सहज ही बढता जाता है.

सतगुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज, बुक : गुरुदेव हरदेव, भाग-1 , पेज 80 
Comments: 1
  • #1

    nirmala (Thursday, 19 May 2016 01:17)

    True