गुणों का ग्राहक बनने से ही प्रभु की कृपा होती है.....

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किसी को गंदगी में पड़ा हुआ सोना मिल जाये तो वह गंदगी की परवाह न करके सोना निकाल लेता है क्योंकि उसे केवल सोने से ही मतलब होता है, इसी प्रकार महापुरुष को केवल गुणों से ही मतलब होता है. वह अवगुणों को छोड़ देता है तथा गुण ग्रहण कर लेता है. हम भी हमेशा गुणों के ही ग्राहक बनें, सबमें गुण ही देखें, हमारा ध्यान दूसरों की अच्छाइयों की और ही जाये, क्योंकि गुणों का ग्राहक बनने से ही प्रभु की कृपा है और हमारा जीवन सुखी होता है.
--सतगुरु बाबा हरदेव सिंह जी--
बुक: दर्पण, पेज 104
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