ऐसी अवस्था जब गुरमुख की हो जाती है तो .....

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जिसका नाता हरि से जुड़ा है, इस दातार से जुड़ा है, जो इसके साथ लिव जोड़कर रखता है तथा उठते-बैठते इसका ध्यान करता है, निराकार का अहसास मन में बिठाकर रखता है और जो यह मानता है की मैं जो बोल भी बोल रहा हूँ, इस दातार की हुजूरी में ही बोल रहा हूँ, और मेरी नज़र जो कुछ भी देख रही है वह भी इस दातार की हुजूरी में ही देख रही है तो वह गुरमुख कभी भी डोलता नहीं, उससे कभी कोई नीच कर्म नहीं होता. वह किसी का निरादर नहीं करता. ऐसी अवस्था जब गुरमुख की हो जाती है तो उसको हर प्रकार की खुशियाँ प्राप्त होती हैं.
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सतगुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज, बुक : दर्पण, पेज 31
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