गुरमुख  गाय की तरह होता है और मनमुख सांप की तरह

 

गुरमुख गाय की तरह होता है और मनमुख सांप की तरह | जैसे गाय को हम घास डालते हैं| कई बार घास मिल जाती है, कई दफा हरी घास नहीं भी मिलती| सूखी घास उसको दे दी जाती है| तब भी गाय हमें दूध ही देती है|  दूसरी तरफ सांप को कटोरे में डालकर हम दूध भी दे दें, तब भी हम जानते हैं की उनके पास तो विष है| वह तो दूध पी के भी डंक ही लगाता है, क्योंकि उसके पास जो है, वही उसने देना है|

 

गुरमुख महापुरषों को हमेशा दूसरों की सहायता करने वाला ही माना जाता है| वे दूसरे का बोझ बांटने वाले माने जाते हैं| उनके सहारे अनेकों-अनेकों का भी पार उतारा हो जाता है| जैसे कील बहुत तीखी होती है| उसको हम किसी लकड़ी में  गाड़ देते हैं, तो वह सुराख कर देती है| नुक्सान कर देती है| अगर उसको पानी में फेंका जाए तो वह पानी में डूब जाएगी और बच नहीं पाएगी| लेकिन उसी पानी में अगर एक लकड़ी का शहतीर तैर रहा है, उसके ऊपर अगर उस कील को रख दिया जाता है तो उस शहतीर के सहारे उस कील का पार उतारा भी हो जाता है | इसी प्रकार महात्माओं के सहारे से मनमुख भी तर जाते हैं|

 

-----निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज

साभार  : बुक : विचार प्रवाह भाग-2, पेज 86-87