भीम की सीख-- हिन्दी कहानी 

महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका थामहाराज युधिष्ठिर राजा बन चुके थेअपने चारों छोटे भाइयों की सहायता से वह राजकाज चला रहे थे प्रजा की भलाई के लिए पाँचों भाई मिलजुल कर जुटे रहतेजो कोई दीन-दुखी फरियाद लेकर आता, उसकी हर प्रकार से सहायता की जाती|

 

एक दिन युद्धिष्ठिर् राजभवन में बैठे एक मंत्री से बातचीत कर रहे थेकिसी समस्या पर गहन विचार चल रहा थातभी एक ब्राह्मण वहाँ पहुँचाकुछ दुष्टों ने उस ब्राह्मण को सताया थाउन्होंने ब्राह्मण की गाय उससे छीन ली थीवह ब्राह्मण महाराज युधिष्ठिर के पास फरियाद लेकर आया थामंत्री जी के साथ बातचीत में व्यस्त होने के कारण महाराज युधिष्ठिर उस ब्राह्मण की बात नहीं सुन पाएउन्होंने ब्राह्मण से बाहर इन्तजार करने के लिए कहा|ब्राह्मण मंत्रणा भवन के बाहर रूक कर महाराज युधिष्ठिर का इंतज़ार करने लगा|

 

मंत्री से बातचीत समाप्त करने के बाद महाराज ने ब्राहमण को अन्दर बुलाना चाहा, लेकिन तभी वहाँ किसी अन्य देश का दूत पहुँच गयामहाराज फिर बातचीत में उलझ गएइस तरह एक के बाद एक कई महानुभावों से महाराज युधिष्ठिर ने बातचीत कीअंत में सभी को निबटाकर जब महाराज भवन से बाहर आये तो उन्होंने ब्राहमण को इंतज़ार करते पायाकाफी थके होने के कारण महाराज युधिष्ठिर ने उस ब्राहमण से कहा, “अब तो मैं काफी थक गया हूँआप कल सुबह आइयेगाआपकी हर संभव सहायता की जाएगी|” इतना कहकर महाराज अपने विश्राम करने वाले भवन की ओर बढ़ गए|

ब्राह्मण को महाराज युधिष्ठिर के व्यवहार से बहुत निराशा हुईवह दुखी मन से अपने घर की ओर लौटने लगाअभी वह मुड़ा ही था की उसकी मुलाकात महाराज युधिष्ठिर के छोटे भाई भीम से हो गईभीम ने ब्राहमण से उसकी परेशानी का कारण पूछाब्राह्मण ने भीम को सारी बात बता दीसाथ ही वह भी बता दिया की महाराज ने उसे अगले दिन आने के लिए कहा है|

 

ब्राहमण की बात सुकर भीम बहुत दुखी हुआउसे महाराज युधिष्ठिर के व्यवहार से भी बहुत निराशा हुईउसने मन ही मन कुछ सोचा और फिर द्वारपाल को जाकर आज्ञा दी, “सैनिकों से कहो की विजय के अवसर पर बजाये जाने वाले नगाड़े बजाएं,” आज्ञा का पालन हुआसभी द्वारों पर तैनात सैनिकों ने विजय के अवसर पर बजाये जाने वाले नगाड़े बजाने शुरू कर दीमहाराज युधिष्ठिर ने भी नगाड़ों की आवाज़ सुनीउन्हें बड़ी हैरानी हुईनगाड़े क्यों बजाये जा रहे हैं, यह जानने के लिए वह अपने विश्राम कक्ष से बाहर आये|

 

कक्ष से बाहर निकलते ही उनका सामना भीम से हो गयाउन्होंने भीम से पूछा, “विजय के अवसर पर बजाये जाने वाले नगाड़े क्यों बजाये जा रहे हैं? हमारी सेनाओं ने किसी शत्रु पर विजय प्राप्त की है?”

 

भीम ने नम्रता से उत्तर दिया, “महाराज, हमारी सेनाओं ने तो किसी शत्रु पर विजय प्राप्त नहीं की|”

“तो फिर ये नगाड़े क्यों बज रहें हैं?| महाराज ने हैरान होते हुए पूछा|

“क्योंकि पता चला है की महाराज युधिष्ठिर ने काल पर विजय प्राप्त कर ली है|” भीम ने उत्तर दिया|

 

भीम की बात सुनकर महाराज की हैरानी और बढ़ गईउन्होंने फिर पुछा, “मैंने काल पर विजय प्राप्त कर ली है| आखिर तुम कहना क्या चाहते हो?|

भीम ने महाराज की आँखों में देखते हुए कहा, “महाराज, अभी कुछ देर पहले आपने एक ब्राहम्ण से कहा था की वह आपको कल मिले| इससे साफ़ जाहिर है की आपको पता है की आज आपकी मृत्यु नहीं हो सकती, आज काल आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता| यह सुनने के बाद मैंने सोचा की अवश्य अपने काल पर विजय प्राप्त कर ली होगी, नहीं तो आप उस ब्राहमण को कल मिलने के लिए न कहते| यह सोच कर मैंने विजय के अवसर पर बजाये जाने वाले नगाड़े बजने की आज्ञा दी थी|”

 

भीम की बात सुनकर महाराज युधिष्ठिर की आँखे खुल गईउन्हें अपनी भूल का पता लग चुका थातभी उन्हें पीछे खड़ा हुआ ब्राहमण दिखाई दे गया| उन्होंने उसकी बात सुनकर एकदम उसकी सहायता का आवश्यक प्रबंध करवा दिया|

 

शिक्षा : नीतिवान लोग कहते हैं, आज के काम को कल पर कभी नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि कल तो काल का नाम है| आज का वर्तमान क्षण ही हमारा है| जो करना है आज, इसी पल कर गुजरो|

 

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Source of story is internet, Courtesy to the writer for such a motivating note.