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Sardar Bikramjit Singh 'Jit'

Poet : Rev. Bikramjeet Singh 'Jit'

 

E-mail : bikramjitsingh@maanavta.com




 

  प्रभु की महिमा 


( बिक्रमजीत सिंघ "जीत" E-mail : bikramjitsingh@maanavta.com )


महिमा अपरम्पार प्रभू की

अति-सुंदर संसार रचाया

पक्षी पशु फूल फल नदियाँ

और सुंदर इंसान बनाया

 

गोरे काले धर्मी पापी

हरकोई भिन भिन लगते हैं

अदभुत लीला प्रभु की देखो

इक इक में खुद बसते हैं

 

कृपा दृष्टि हो जाये जिसपर

धन्य वही है कहलाता

भक्ति भाव से अपने भीतर

झलक प्रभू की है पाता

 

मन में निष्ठा जो हो सच्ची

हरपल  रक्षा स्वयं ये करता

दूख वेदना रोग व् चिंता

समस्त संकट सदैव ये हरता

 

तीर्व गति से समय चल रहा

व्यर्थ गवा अब इसे  प्राणी

करले "जीत" जगत की सेवा

ले धार ह्रदय सतगुर की वाणी

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