हम समझ सकें ब्रह्मज्ञान को

(हिन्दी आध्यात्मिक कविता) कवि : श्री भूपिंदर सेठी 'अमन'

देख खुदा की शान को

जिसने बनाया इंसान को
यह पाकर चोला इंसान का 
क्यूँ भूल गया एहसान को
देकर नफरत और धोखा
इंसान चाहे सम्मान को
स्वार्थ में भूला रिश्ते नाते
भेंट करे अपमान को
औलाद होकर इंसान की
है पूज रहा शैतान को
इतनी शक्ति बख्शो सत्गुरू 
हम समझ सकें ब्रह्मज्ञान को