समय

हिन्दी कविता 

(संकलन करता : श्री भगत धवन जी, डेनमार्क )

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समय बड़ा बलवान

कभी न रुकता

कभी न थकता

चलता  गर्दन तान

समय के आगे शीश झुकाए

रहे न एक समान

नर हो या भगवान्

 

बेशक  उसकी  शान  निराली

भूल नहीं  भोला है माली

यह  है तेरी  खास ख्याली

फूल  के बदले फुलवाड़ी में

कांटे भी तो बो सकता है

ऐसा भी तो कर सकता है

 

जंगल धरती पर्वत सागर

भंवर में तरती जीवन गागर

गतिशील है तेरा  सिरजन

काबा हो या फिर वृन्दावन

यही है तेरी शान

समय है तू बलवान

मुस्काता इतिहास रचाता

कभी कहीं तू ठहर न पाता

करे न तू विश्राम

यही है तेरी शान


Courtesy to original poet for this such a motivating and beautiful poem.

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