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मामला ही अजीब हो गया है ! (कविता)

कवि : श्री अश्वनी कुमार 'जतन'


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जब से खुदा तू मेरा हबीब हो गया है,
सच कहूं तो मामला ही अजीब हो गया है,

न परवाह खुद की ना अरमानों की,
न तमन्ना अपनों की ना अन्जानों की,
अब तू ही मेरी तकदीर मेरा नसीब हो गया है,
सच  कहूं  तो मामला ही अजीब हो गया है ,

जब से तुझसे ही तेरे रूप को जाना मैंने,
तेरे हस्ती को दिल-ओ-जां से है माना मैंने,
तू ही मेरी आदत मेरी तहज़ीब हो गया है,
सच  कहूं तो मामला ही अजीब हो गया है ,

जिधर भी देखता हूँ तू ही नज़र आता है,
तेरा जलवा मेरी हर-सू नज़र को भाता है,
तू ही मेरा जिस्म-ओ-जां तू ही रकीब हो गया है,
सच  कहूं तो मामला ही अजीब हो गया है ,

तुझे हम अपने इतना करीब पाते हैं,
कि याद करना तलक भूल जाते हैं,
मेरे वजूद से भी ज्यादा तू करीब हो गया है.
सच  कहूं  तो मामला ही अजीब हो गया है .
Comments: 6
  • #6

    Ashwani Kumar "Jatan" (Wednesday, 04 December 2013 04:05)

    Aap sabhi ko tah-e-dil se shukriya...........!

  • #5

    Ajeet Singh (Saturday, 11 August 2012 12:10)

    ashavani ji baut khub farmaya hai aapne... datar ki rhamat aap pr isi tarha bani rhe.....

  • #4

    Sonu (Sunday, 18 March 2012 04:50)

    very beautiful ji/.........

  • #3

    shaku,pathankot (Tuesday, 24 January 2012 23:23)

    a very nice &sweet poem

  • #2

    dilpreet kaur, amritsar punjab (Tuesday, 24 January 2012 01:13)

    beautifull expression.

  • #1

    parmarthi, delhi (Sunday, 22 January 2012 05:33)

    very good poem, god bless you.