Uploaded on 27th August, 2011

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Rev. Ashwani Kumar 'Jatan'
Rev. Ashwani Kumar 'Jatan'

 

Name : Rev. Ashwani Kumar 'Jatan'

 

City : Allahabad, UP

 

E-mail id : ashwanikumarjatan@maanavta.com



प्यार कि कितनी कमी हो गई !

सतगुरु ने तो खुशियाँ दी थी लेकिन मन मे गमी  हो गई
खुद जीवन मे झांके देखें प्यार कि कितनी कमी हो गई.............


जब एक पिता कि बालक हैं तो वैर विरोध कि बात करें क्यों
क्यों कहते ये फलक तुम्हारा मेरे तो बस जमी हो गई,
खुद जीवन मे झांके देखें प्यार कि कितनी कमी हो गई.............

ज्ञान अमोलक दिया गुरु ने लेकिन इसकी कदर न जानी,
इस दर पे भी मनमत करते ये कैसे सर जमी हो गई,
खुद जीवन मे झांके देखें प्यार कि कितनी कमी हो गई.............

सतगुरु पे विश्वास है अपना लेकिन गुरसिख भाता ना,
दिल मे बन गए गाँठ हमारे कैसे खींचा तानी हो गए,
खुद जीवन मे झांके देखें प्यार कि कितनी कमी हो गई.............

सतगुरु ने है जनम दिया और बड़े लाड से पाला है,
दिया गुरु ने हँसता चेहरा आँख ये क्यों शबनमी हो गई,
खुद जीवन मे झांके देखें प्यार कि कितनी कमी हो गई.........................................

ऐसे ना खुश होगा सतगुरु ये भी हमको मालुम है,
आओ कर लें नेक कमाई गलत ये क्यों आमदनी हो गई,
खुद जीवन मे झांके देखें प्यार कि कितनी कमी हो गई.............

भक्ति तो है शब्द मुकम्मल जिसमे प्यार जरुरी है,
लेकिन कहना पड़ रहा है प्यार कि राहजनी हो गए,
खुद जीवन मे झांके देखें प्यार कि कितनी कमी हो गई.............

अपना भला जो चाहो तो बस गुरु चरणों मे शीश झुकाओ,
"जतन" ये कहता है खुल करके बात यही लाज़मी हो गई,
खुद जीवन मे झांके देखें प्यार कि कितनी कमी हो गई.............
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