Mujhko Qaid Tumhari Mil Jaye

Hindi Adhyatmik Kavita (Poem)

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Rev. Ashwani Kumar 'Jatan'
Rev. Ashwani Kumar 'Jatan'

 

Name : Rev. Ashwani Kumar 'Jatan'

 

City : Allahabad, UP

 

E-mail id : ashwanikumarjatan@maanavta.com

हम सबकी बस यही दुआ है, जीवन फूल सा खिल जाये,
दुनिया को चाहिए आजादी, मुझको कैद तुम्हारी मिल जाये,

वचन जो तेरा आ जाये तो, ख़ुशी अजब सी छा जाये,
बोल और कर्म हो ऐसे जिसको, देख सभी का मन भाये,
झुका जो तेरे दर पर ये सर, और कहीं  न झुक पाए ,
दुनिया को चाहिए आजादी, मुझको कैद तुम्हारी मिल जाये,

बोल तो इतने मीठे हो कि, स्वाद शहद  का फीका हो,
हो हालत जैसे भी लेकिन, तनिक मिजाज़ न तीखा हो,
मुक्ति पर्व पे यही दुआ है, भक्ति भी हमको मिल जाये,
दुनिया को चाहिए आजादी, मुझको कैद तुम्हारी मिल जाये,

मुश्किल से मुश्किल हालातों मे भी, विश्वास तनिक न कम हो,
चेहरा खिलता रहे हमेशा, जीवन मे बेशक कोई गम हो,
अँधा विश्वास हो सतगुरु पे तो, सुख भी सारे मिल जायें,
दुनिया को चाहिए आजादी, मुझको कैद तुम्हारी मिल जाये,

"जतन" को भीं अब ओहदा चाहिए, फल जो दे वो पौधा चाहिए,
हो घाटा न जिसमे थोडा, मुझको तो वो सौदा चाहिए,
सेवादारी का ओहदा, "जतन" को तेरे दर से मिल जाये,
दुनिया को चाहिए आजादी, मुझको कैद तुम्हारी मिल जाये,

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