Uploaded on 31/07/2011

गलती किसकी

(हिन्दी अध्यात्मिक कविता)

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Rev. Ashwani Kumar  'Jatan'
Rev. Ashwani Kumar 'Jatan'

Name : Rev. Ashwani Kumar 'Jatan'

 

City : Allahabad, UP

 

E-mail id : ashwanikumarjatan@maanavta.com

एक बार मेरे मन मे ये विचार आया,
ज्ञान लेने के बावजूद भी मेरे जीवन मे आनंद क्यों नहीं आया,
आज भी ज़िन्दगी कि हुई है ऐसी कि तैसी,
मेरे हालत वैसी ही है कल थे जैसी,
यहाँ आने का मुझे क्या फायदा मिला,
जीवन का मुरझाया फूल यहाँ आकर भी कंहा खिला,
तभी उधर से एक संत जा रहे थे,
मैंने देखा वो मेरे ही पास आ रहे थे,
वो कहने लगे महाराज आप परेशान लग रहे हैं,
सच्चा ज्ञान व गुरु पाकर भी हैरान लग रहे हैं,
मेरे दिल मे जो था मैंने उनसे सब बोल दिया,
मानो प्रशनों और सवालों का बाँध खोल दिया,
मैंने कहा मे जो भी करता हूँ वो उल्टा हो जाता है,
दुनिया कि इस भीड़ मे ये अश्वनी कुमार 'जतन' ही क्यों खो जाता है,
मेरा बनता हुआ काम भी हमेशा अटक जाता है,
मुंह के पास आया हुआ निवाला भी कोई और गटक जाता है,
मेरे विश्वास का ढांचा बुजुर्गों के नकली दांत कि तरह हिल जाता है,
मैं हमेशा देखता हूँ मेरा हिस्सा भी किसी और को मिल जाता है,
 मैं रविवार को भवन आकर दरी भी बीछाता हूँ,
प्रमुख साहब के एक फ़ोन पर दौड़ कर भवन आता हूँ,
फिर भी मेरी बद-किस्मती क्यों आबाद रहती  है,
उजाले मे भी क्यों सियाह रात रहती है,
मैं हमेशा सबसे पीछे क्यों रह जाता हूँ,
मैं तो रसीदें भी कटा कर समागम भी पहले जाता हूँ,
सिमरन अरदास भी दिन रात करता हूँ,
संतो महात्माओं के आशीर्वाद से झोली भी भरता हूँ,
फिर वो संत कहने लगे इसमे सारी गलती तेरी है,
तुझे रहमत तो मिल जाती पर तेरे वजह से हुई देरी है,
मैं तेरे सारी बात समझ गया जो तुने अभी बक्का है,
दरअसल तूने ज्ञान को चिराग  और गुरु को अलादीन समझ रक्खा है,
तू कहाँ गुरु से सच्चा रिश्ता निभाता है,
तू सत्संग में भी रिश्तेदारी निभाने जाता है,
तू तो खामियों का जीता जागता मुजस्सिमा है,
ये सोच क्या कभी गुरु ने तेरा गुनाह गिना है,
अब भी वक़्त है तू जरा सोच विचार ले,
गुरु सब कुछ देगा तू बस अपनी आदत सुधार ले,
तुझे तो गुरु ने अपने दिल मे बसाया है,
और तेरे लिए ही दो जहां कि खुशियाँ ले कर आया है,
तू क्यों छोटी-छोटी बातों पर विचलित हो जाता है,
गुरु तो कोई बड़ी चीज़ देने से पहले बन्दे को उस लायक बनाता है,
जबसे उस संत कि बातों का राज़ समझ आया है,
सच बताऊँ  "जतन" तो जीवन में  सब सुख पाया है.!

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