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बज़्म -ए -सुखन (कविता)

खुदा के आसरे जो भी, यहाँ जीवन बिताते हैं,
रहते हैं वो हरदम खुश, सदा खुशियाँ मनाते हैं,
उठा लो वेद ग्रंथों को, पढो आयत मुक़द्दस तुम,
खुदा हाज़िर है ज़र्रे में, यही सारे बताते हैं,
ईलाही इल्म को जिसने भी, माना है ज़माने में,
फ़िक्र उनको नहीं कोई, गम आते और जाते हैं,
जिसे भी ऐ मेरे मौला, तेरा एक नूर मिल जाये,
लबा-लब हैं सिर-ए-पा तक, ना वो आंसू बहाते हैं,
बन जाना बड़ा शायर, नहीं ये बात ऊंची है,
बड़े वो ही कहाते हैं, जो गर्दन को झुकाते हैं,
"जतन" का शौक़ है लिखना, मगर लिखना नहीं आता,

जो कुछ भी ये लिखता है, खुदा ये खुद लिखाते हैं,

Name : Rev. Ashwani Kumar 'Jatan'

 

City : Allahabad, UP

 


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