बौद्ध धर्म


बुद्ध की पत्थर की मूर्ति
बुद्ध की पत्थर की मूर्ति

बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और दर्शन है । इसके प्रस्थापक महात्मा बुद्ध शाक्यमुनि (गौतम बुद्ध) थे । वे 563 ईसा पूर्व से 483 ईसा पूर्व तक रहे । उनके महापरिनिर्वाण के अगले पाँच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फ़ैला, और अगले दो हज़ार सालों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीप में भी फ़ैल गया । आज, हालाँकि बौद्ध धर्म में तीन सम्प्रदाय हैं: हीनयान या थेरवादमहायान और वज्रयान । परन्तु हीनयान या थेरवाद बौद्ध धर्म का प्रमुख सम्प्रदाय है । बौद्ध धर्म को अड़तीस करोड़ से अधिक लोग मानते हैं और यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है ।

 

दस पारमिताओं का पूर्ण पालन करने वाला बोधिसत्व कहलाता है । बोधिसत्व जब दस बलों या भूमियों (मुदिता, विमला, दीप्ति, अर्चिष्मती, सुदुर्जया, अभिमुखी, दूरंगमा, अचल, साधुमती, धम्म-मेघा) को प्राप्त कर लेते हैं तब "बुद्ध" कहलाते हैं, बुद्ध बनना ही बोधिसत्व के जीवन की पराकाष्ठा है । इस पहचान को बोधि नाम दिया गया है । कहा जाता है कि बुद्ध शाक्यमुनि केवल एक बुद्ध हैं - उनके पहले बहुत सारे थे और भविष्य में और होंगे । उनका कहना था कि कोई भी बुद्ध बन सकता है अगर वह दस पारमिताओं का पूर्ण पालन करते हुए बोधिसत्व प्राप्त करे और बोधिसत्व के बाद दस बलों या भूमियों को प्राप्त करे । बौद्ध धर्म का अन्तिम लक्ष्य है सम्पूर्ण मानव समाज से दुःख का अंत । "मैं केवल एक ही पदार्थ सिखाता हूँ - दुःख है, दुःख का कारण है, दुःख का निरोध है,और दुःख के निरोध का मार्ग है" (बुद्ध) । बौद्ध धर्म के अनुयायी अष्टांगिक मार्ग पर चलकर न के अनुसार जीकर अज्ञानता और दुःख से मुक्ति और निर्वाण पाने की कोशिश करते हैं ।

Comments: 0

COURTESY : http://en.wikipedia.org/wiki/Buddhism